चाँद की कटोरी लेकर के जब
रात हमारे घर आएगा
खुल के बिखरना बिखरके सजना
पास तुम्हे मेरे पाएगा
रूप तुम्हारा देखेगा जब
शरमाकर के छुप जायेगा
सूरज से किरने लाएगा
सारी किरणों को ऊपर से
हम दोनों पर बिखराएगा
चाँद कटोरी लेकरके जब
रात हमारे घर आएगा ।
Friday, February 4, 2011
Thursday, February 3, 2011
घाव
डूबने वाले नदी के घाट पर डूबा किये,
यह तमाशा हम कलम की नोक से देखा किये।
आपने पत्थर उछाला है शिकारों की तरफ ,
ज़िन्दगी भर घाव फूलो की तरह महका किये।
यह तमाशा हम कलम की नोक से देखा किये।
आपने पत्थर उछाला है शिकारों की तरफ ,
ज़िन्दगी भर घाव फूलो की तरह महका किये।
राजमुकुट
मैं राजा बनाना चाहता था
एकदम वैसा ही
जैसा मेरी माँ के पूजा घर में
टंगे कलेंडर में बना है एक राजा
चमकीले से कपडे का पहना है उसने राजमुकुट
मै भी पहनना चाहता था वैसा ही राजमुकुट
मैंने अपनी बहन के खिलोने के डिब्बे से
चुरा लिया था उसका चमकीला कपड़ा
और बनाया था उससे अपने लिए राजमुकुट
मैं भी लग रहा था एकदम वैसा ही राजा
जिसने पहन रखा था एक चमकीला सा राजमुकुट
जो किसी और के हिस्से के चिथड़ो का था।
एकदम वैसा ही
जैसा मेरी माँ के पूजा घर में
टंगे कलेंडर में बना है एक राजा
चमकीले से कपडे का पहना है उसने राजमुकुट
मै भी पहनना चाहता था वैसा ही राजमुकुट
मैंने अपनी बहन के खिलोने के डिब्बे से
चुरा लिया था उसका चमकीला कपड़ा
और बनाया था उससे अपने लिए राजमुकुट
मैं भी लग रहा था एकदम वैसा ही राजा
जिसने पहन रखा था एक चमकीला सा राजमुकुट
जो किसी और के हिस्से के चिथड़ो का था।
एक पल
बहुत दिनों के बाद जब कोई लौटे अपना
और कुछ न कहे बस मुस्कुरा दे
जाने कितनी दूरियों की बर्फ को
बस पल भर में पिघला दे
ऐसा एहसास जो न था पहले कभी भी
उन सब तमन्नाओ को एक पल में जगा दे
बस वह एक पल मुझको मेरे खुदा
मेरी सारी उम्र के बदले में मुझको दिलादे
और कुछ न कहे बस मुस्कुरा दे
जाने कितनी दूरियों की बर्फ को
बस पल भर में पिघला दे
ऐसा एहसास जो न था पहले कभी भी
उन सब तमन्नाओ को एक पल में जगा दे
बस वह एक पल मुझको मेरे खुदा
मेरी सारी उम्र के बदले में मुझको दिलादे
Tuesday, February 1, 2011
मीठा सपना
दो दिन की हाढ़ तोढ़ मेहनत के बाद
कल रात बहुत सुकून से सोया था
बड़ी नेमत है यह नींद भी
समझ में कल शाम को आया था
नींद में एक सपना सूख रहा था कब से
कल रात उसने खूब हँसाया था
बहुत गहरी नींद में कल रात
एक मीठा सा सपना आया था।
कल रात बहुत सुकून से सोया था
बड़ी नेमत है यह नींद भी
समझ में कल शाम को आया था
नींद में एक सपना सूख रहा था कब से
कल रात उसने खूब हँसाया था
बहुत गहरी नींद में कल रात
एक मीठा सा सपना आया था।
सूरज की खोज
रोज चढ़ता है उतरता है सूरज
जाने क्या खोजता रहता है सूरज
घर की मुंडेर पे सारा दिन
यूँ ही बेसबब टंगा रहता है सूरज
इतना बड़ा होकर भी जाने क्यों
पेड़ की परछाई से डरता है सूरज
मैंने पूछा जो लपक कर उस दिन
झट जा के कही दूर छुपा था सूरज
मैंने खोजा तो बहुत है उसको
मिलता ही नहीं है मुझको तबसे सूरज
कोई कहता है मुझे तबसे यू ही
शायद किसी मासूम से चेहरे में छुपा है सूरज
मैंने खोजा तो बहुत है उसको
क्या तुमने कही देखा है सूरज ?
जाने क्या खोजता रहता है सूरज
घर की मुंडेर पे सारा दिन
यूँ ही बेसबब टंगा रहता है सूरज
इतना बड़ा होकर भी जाने क्यों
पेड़ की परछाई से डरता है सूरज
मैंने पूछा जो लपक कर उस दिन
झट जा के कही दूर छुपा था सूरज
मैंने खोजा तो बहुत है उसको
मिलता ही नहीं है मुझको तबसे सूरज
कोई कहता है मुझे तबसे यू ही
शायद किसी मासूम से चेहरे में छुपा है सूरज
मैंने खोजा तो बहुत है उसको
क्या तुमने कही देखा है सूरज ?
मेरी खोज
कितना महफूज सा पता हूँ मैं खुद को तेरी निगाहों में
जैसे फ़रिश्ता पलता है खुदा की बाहों में
हौले से जगाना मेरे मन तू उसको
जैसे गुलाबी पंखुड़ी से ओस ढलक जाये
डरता हूँ मैं कितना बेसबब यू ही
जाने क्या खोजता हूँ पाता हूँ जाने क्या?
जैसे फ़रिश्ता पलता है खुदा की बाहों में
हौले से जगाना मेरे मन तू उसको
जैसे गुलाबी पंखुड़ी से ओस ढलक जाये
डरता हूँ मैं कितना बेसबब यू ही
जाने क्या खोजता हूँ पाता हूँ जाने क्या?
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